स्वामी स्तोत्र भगवान, गुरु, या किसी पूजनीय व्यक्ति की महिमा और गुणों का बखान करने वाले भक्तिमय पद या छंद होते हैं। स्तोत्र पाठ का मुख्य उद्देश्य उस आराध्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना, उनसे आशीर्वाद मांगना और उनके गुणों का ध्यान करके स्वयं में सकारात्मकता लाना है।
Swami Stotra
श्रीस्वामीसमर्थस्तोत्रम्
स्वामिन्नमस्तेऽक्कलकोटवासिन् समर्थनाम्नेऽपरनारसिंह ।
त्रीशावतार त्रितयार्तिहारिन् प्रचण्डकाय प्रणयैकशुल्क ॥ १॥
प्रपन्नकल्पद्रुम पापदाव स्फुल्लिङ्गनेत्रोदकशील साधो ।
आजानुबाहोऽगमलील योगिन् ज्ञ स्वैरचारिन्नतितुष्ट तिष्ये ॥ २॥
दिग्वस्त्रभूष प्रविदग्धपूषन् कारुण्यसिन्धो नतदीनबन्धो ।
मां बालरङ्गं कृपयोद्धर त्वं जहीह मां मा भवसिन्धुपोत ॥ ३॥
स्तोत्रं स्वामीसमर्थस्य चतुर्विंशतिनाममृत ।
यः पठेत्प्रयतो भक्त्या निर्भयः स सुखी भवेत् ॥ ४॥
इति श्री दत्तपादारविन्दमिलिन्द ब्रह्मचारिपाण्डुरङ्ग अथवा
रङ्गावधूतमहाराजविरचितं चतुर्विंशतिनाम
श्रीस्वामीसमर्थस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


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