Budh Stotra एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक स्तोत्र है, जो बुध ग्रह के शुभ प्रभावों को जाग्रत करने और इसके दोषों को शांत करने के लिए पढ़ा जाता है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, गणित, तर्क, व्यापार और संचार का प्रतिनिधि माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में बुध कमजोर होता है या जिनकी वाणी में झिझक, निर्णय में असमर्थता, बार-बार व्यापार में हानि या मानसिक असंतुलन होता है, उनके लिए यह स्तोत्र अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसे श्रद्धापूर्वक पढ़ने से न सिर्फ वाणी दोष और निर्णय की कमजोरी को दूर होती है, बल्कि कोर्ट केस, करियर व संवाद में विजय दिलाता है।
बहुत से भक्त पूछते हैं कि यह स्तोत्र कब, कैसे और क्यों पढ़ा जाए, तो इसका उत्तर सीधा है: बुधवार का दिन और प्रातःकाल का समय इस स्तोत्र के लिए सबसे शुभ माना जाता है। पूजा करते समय हरे वस्त्र पहनना, हरी मूंग का दान करना और “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना इसके प्रभाव को और अधिक बढ़ाता है। यह स्तोत्र केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि मानसिक ऊर्जा, वाणी की स्पष्टता और करियर में स्थिरता पाने का एक शक्तिशाली साधन है। यह उन सभी के लिए वरदान है जो बोलचाल, शिक्षा, व्यापार या रिश्तों में समस्याओं से जूझ रहे हैं।
Budh Stotra
बुध स्तोत्र
पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता ।
धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च ।।
प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ।।
सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित: ।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम ।।
उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति: ।
सूर्यप्रियकरोविद्वान पीडां हरतु मे बुधं ।।
शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन: ।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ।।
श्याम: शिरालश्चकलाविधिज्ञ:, कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्या-दाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र:।।
अहो चन्द्रासुत श्रीमन मागधर्मासमुदभव: ।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक: ।।
गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित: ।
केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित: ।।
ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज: ।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन: ।।
गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा ।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।।
एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर: ।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीडा न जायते ।।
बुध स्तोत्र के लाभ
- बुध ग्रह बुद्धि और तर्कशक्ति का कारक है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मानसिक क्षमता बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
- बुध वाणी और संवाद का प्रतिनिधि है। इस स्तोत्र के जाप से वाणी में मधुरता और स्पष्टता आती है, जिससे सामाजिक और व्यावसायिक संबंध मजबूत होते हैं।
- बुध व्यापार का स्वामी है। इस स्तोत्र के पाठ से व्यापारिक क्षेत्र में उन्नति होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- बुध स्तोत्र का पाठ मानसिक तनाव को कम करता है और जीवन में संतुलन लाता है।
पूजा विधि
- बुधवार के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके हरे रंग के वस्त्र पहनकर बैठें।
- हरे रंग के फूल, हरी मूंग, दूर्वा घास, तांबे या कांसे के पात्र में जल, और हरा कपड़ा।
- बुध स्तोत्र का पाठ करने से पहले भगवान गणेश की स्तुति करें।
- “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें, फिर बुध स्तोत्र का पाठ करें।
- पूजा के बाद हरी सब्जियों का दान करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।
सही समय
- बुधवार को बुध ग्रह की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ है।
- सूर्योदय के समय पूजा करना अधिक लाभकारी है।
व्रत और उपाय
- बुधवार को उपवास रखने से बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
- गरीबों को हरी मूंग, हरे वस्त्र, या हरी सब्जियों का दान करें।
- “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का नियमित जाप करें।
- बुध ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए बुध कवच का पाठ करें।
बुध स्तोत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से बुध ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सफलता, समृद्धि और शांति का वास होता है।
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