Rin Mochan Maha Ganapati Stotram

ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र

ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है जो भगवान महागणपति को समर्पित है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो कर्ज़, आर्थिक तंगी, बाधाओं और रुकावटों से परेशान हैं। “ऋणमोचन” का अर्थ है ऋण से मुक्ति दिलाने वाला, और इस स्तोत्र का पाठ भगवान गणेश की कृपा से जीवन में आई हुई आर्थिक परेशानियों को दूर करता है। यह स्तोत्र शास्त्रों में वर्णित है और इसे नियमित श्रद्धा से पढ़ने पर विघ्नों का नाश, कर्ज से छुटकारा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

ॐ स्मरामि देव-देवेश, वक्र-तुण्डं महा-बलम्।

षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये।।

महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम्।

महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम्।

एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये।।

शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम्।

सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम्।

रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम्।

कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम्।

पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम्।

नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

धूम्राम्बरं धूम्र-वर्णं, धूम्र-गन्धानुलेपनम्।

धूम्र-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

सर्वाम्बरं सर्व-वर्णं, सर्व-गन्धानुलेपनम्।

सर्व-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

भद्र-जातं च रुपं च, पाशांकुश-धरं शुभम्।

सर्व-विघ्न-हरं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।।

यः पठेत् ऋण-हरं-स्तोत्रं, प्रातः-काले सुधी नरः।

षण्मासाभ्यन्तरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति।


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