चन्द्र स्तोत्र
चन्द्र स्तोत्र एक पवित्र वैदिक स्तुति है जो चन्द्रदेव (चाँद) को समर्पित है। इसे पाठ करने का उद्देश्य मन की शांति, सौम्यता, मानसिक संतुलन, और सौभाग्य की प्राप्ति होता है। चन्द्रमा को मन का अधिपति (Mind Controller) माना गया है, और वह जीवन में शीतलता, कलात्मकता, प्रेम, भावनाओं और कल्पनाशक्ति का प्रतीक है।
चंद्र स्तोत्र
ॐ श्वेताम्बर:श्वेतवपु:। किरीटी श्वेतधुतिर्दणडधरोद्विबाहु:।
चन्द्रोऽम्रतात्मा वरद: शशाऽक: श्रेयांसि महं प्रददातु देव: ।।1।।
दधिशऽकतुषाराभं क्षीरोदार्नवसम्भवम्। नमामि शशिनंसोमंशम्भोर्मुकुटभूषणम् ।।2।।
क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणीसहित: प्रभुः। हरस्य मुकटावास बालचन्द्र नमोस्तु ते ।।3।।
सुधामया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम्। सर्वान्नरसहेतुंतं नमामि सिन्धुनन्दनम् ।।4।।
राकेशं तारकेशं च रोहिणी प्रियसुन्दरम्। ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुह: ।।5।।



