पितृ देव स्तोत्र – Pitra Dev Stotra

पितृ देव स्तोत्र एक अत्यंत श्रद्धा से भरा हुआ वैदिक स्तोत्र है, जो हमारे पितरों (पूर्वजों) को समर्पित होता है। यह स्तोत्र उनकी आत्मा की शांति, कृपा और वंश की उन्नति के लिए पाठ किया जाता है। इसे पढ़ने से व्यक्ति पितृ ऋण से मुक्त होता है और परिवार में सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक शुद्धि आती है। यह स्तोत्र खासकर पितृ पक्ष, अमावस्या, या श्राद्ध के दिनों में पाठ करने के लिए अत्यधिक फलदायक माना गया है। जो लोग अपने जीवन में बिना कारण परेशानियों, विवाह में बाधा, संतान-संबंधी समस्याएं या आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहे हैं, उन्हें यह स्तोत्र विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है।

Pitra Dev Stotra
पितृ देव स्तोत्र

1- अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

2- इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।।

3- मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।।

4- नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

5- देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि:।।

6- प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

7- नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।

8- सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।

9- अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:।।

10- ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:।।

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज।।


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