गोपिका विरह गीतम् श्रीमद्भागवत महापुराण (भागवत पुराण) के दशम स्कंध (Book 10), अध्याय 30 में वर्णित एक अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण गीत है, जिसमें गोपियों द्वारा श्रीकृष्ण के वियोग में गाया गया विलाप (विरह) वर्णित है।
Gopika Virah Geetam
गोपिका विरह गीतम्
एहि मुरारे कुंजविहरे एहि प्रणत जन बन्धो
हे माधव मधुमथन वरेण्य केशव करुणा सिंधो
रास निकुंजे गुन्जित नियतम भ्रमर शतम किल कांत
एहि निभ्रित पथ पंथ
त्वमहि याचे दर्शन दानम हे मधुसूदन शान्त
सुन्यम कुसूमासन मिह कुंजे सुन्यम केलि कदम्ब
दीनः केकि कदम्ब
मृदु कल ना दम किल सवि षदम रोदित यमुना स्वंभ
नवनीरजधर श्यामल सुंदर चंद्रा कुसुम रूचि वेश
गोपी गण ह्रिदेयेश
गोवर्धन धर वृंदावन चर वंशी धर परमेश
राधा रंजन कान्स निशुदन प्रणति सातवक चरने निखिल निराश्रये शरने
एहि जनार्दन पीतांबर धर कुंजे मन्थर पवने



