Karthaveeryarjuna Stotram भगवान कार्तवीर्य अर्जुन को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। कार्तवीर्य अर्जुन को सहस्रार्जुन के नाम से भी जाना जाता है — वे सहस्र बाहु वाले महान राजा थे जो अपने अद्भुत सामर्थ्य, ऐश्वर्य और न्यायप्रिय शासन के लिए प्रसिद्ध हैं। इस स्तोत्र के पाठ से साधक को धन-संपत्ति, भूमि विवादों से मुक्ति और कर्ज मुक्ति जैसे लाभ मिलते हैं।
इसको पढ़ने से भगवान कार्तवीर्य अर्जुन की कृपा से अटके हुए धन की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि जो लोग कोर्ट-कचहरी के मामलों में फँसे होते हैं या बार-बार आर्थिक नुकसान झेलते हैं, उनके लिए यह स्तोत्र विशेष रूप से लाभकारी है। यह साधक के मन से डर दूर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। इस स्तोत्र का पाठ मंगलवार या रविवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में करना शुभ माना जाता है। अगर भूमि या संपत्ति से जुड़े विवाद हों तो इस स्तोत्र का 21 या 41 दिन तक नियमित पाठ करने की सलाह दी जाती है। इसे शांत मन से स्नान करके भगवान कार्तवीर्य अर्जुन की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर पढ़ें।
Karthaveeryarjuna Stotram
कार्तवीर्य द्वादशनामस्तोत्रम्
कार्तवीर्यार्जुनो नाम राजा बाहुसहस्रवान् ।
तस्य स्मरणमात्रेण गतं नष्टं च लभ्यते ॥ १॥
कार्तवीर्यः खलद्वेषी कृतवीर्यसुतो बली ।
सहस्रबाहुः शत्रुघ्नो रक्तवासा धनुर्धरः ॥ २॥
रक्तगन्धो रक्तमाल्यो राजा स्मर्तुरभीष्टदः ।
द्वादशैतानि नामानि कार्तवीर्यस्य यः पठेत् ॥ ३॥
सम्पदस्तत्र जायन्ते जनस्तत्र वशं गतः ।
आनयत्याशु दूरस्थं क्षेमलाभयुतं प्रियम् ॥ ४॥
सहस्रबाहुसशरं महितं
सचापं रक्ताम्बरं रक्तकिरीटकुण्डलम् ।
चोरादि-दुष्टभय-नाशं इष्टदं तं
ध्यायेत् महाबल-विजृम्भित-कार्तवीर्यम् ॥ ५॥
यस्य स्मरणमात्रेण सर्वदुःखक्षयो भवेत् ।
यन्नामानि ᳚महावीर्यश्चार्जुनः कृतवीर्यवान्᳚ ॥ ६॥
हैहयाधिपतेः स्तोत्रं सहस्रावृत्तिकारितम् ।
वाञ्चितार्थप्रदं नृणां स्वराज्यं सुकृतं यदि ॥ ७॥
॥ इति कार्तवीर्य द्वादशनाम स्तोत्रम् ॥
अर्जुनः कृतवीर्यस्य सप्तद्वीपेश्वरोऽभवत् ।
दत्तात्रेयाद्धरेरंशात् प्राप्तयोगमहागुणः ॥
न नूनं कार्तवीर्यस्य गतिं यास्यन्ति पार्तिवाः ।
यज्ञदानतपोयोगश्रुतवीर्यजयादिभिः ॥
पञ्चाशीतिसहस्राणि ह्यव्याहतबलःसमाः ।
अनष्टवित्तस्मरणो बुभुजेऽक्षय्यषड्वसु ॥
तस्य पुत्रसहस्रेषु पञ्चैवोर्वरिता मृधे ।
जयध्वजः शूरशेनो वॄषभो मधुरूर्जितः ॥
॥ इति कार्तवीर्य द्वादशनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या Karthaveeryarjuna Stotram रोज़ पढ़ सकते हैं?
हाँ, रोज़ या कम से कम मंगलवार और रविवार को इसका पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से धन-संबंधी रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
क्या इसे घर पर पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, इसे आप घर के पूजा स्थान पर भगवान कार्तवीर्य अर्जुन की तस्वीर या मूर्ति के सामने श्रद्धा से पढ़ सकते हैं। शुद्ध और शांत वातावरण लाभकारी रहता है।
कितने दिनों तक पढ़ना चाहिए?
यदि भूमि या कोर्ट-कचहरी से जुड़ा मामला हो तो लगातार 21 या 41 दिन तक इसका पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ भगवान की पूजा में लाल पुष्प और घी का दीपक अर्पित करें।
क्या बच्चे भी इसे पढ़ सकते हैं?
बच्चों को माता-पिता इसका अर्थ सरल भाषा में समझाकर या श्रवण कराकर प्रेरित कर सकते हैं ताकि उनमें साहस, आत्मबल और कर्तव्यपरायणता का भाव बना रहे।



