Shiv Raksha Stotra

शिव रक्षा स्तोत्र एक शक्तिशाली संस्कृत स्तोत्र है, जिसे महर्षि याज्ञवल्क्य ने भगवान नारायण के स्वप्नादेश से रचा था। यह स्तोत्र भगवान शिव के विभिन्न रूपों का स्मरण कर शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना करता है, जिससे यह एक आध्यात्मिक कवच का कार्य करता है।

इसका नियमित पाठ साधक को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है, साथ ही आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि में वृद्धि करता है। यह स्तोत्र नकारात्मक शक्तियों, रोगों और शत्रुओं से रक्षा करता है।​

 Shiv Raksha Stotra
श्री शिवरक्षास्तोत्रम्

ॐ अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमंत्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः, श्री सदाशिवो देवता, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः।

स्तोत्रम् :

जाज्वल्यमानमृगपत्मगतोर्ध्वमौलिं
गङ्गावतंसमकुटं वृषवाहनाम्रिम्।
अम्बिकासहचरं कृपया कृपालुं
ध्यानं समर्थममलं शिवमेकमीडे ॥१॥

गले रुणद्धि कलिकण्ठं रुद्राक्षमालां
शिरसि शूलकृतवामां भस्माङ्गरागम्।
पाणौ दक्षिणगते नीलकण्ठमीडे
वामे पिनाकधरं अग्निजिह्वमीडे ॥२॥

माण्डल्यमण्डितकपालविभूषणं च
वामाङ्कगं च सुरसुन्दरविग्रहम्।
वन्देऽहमेकमनघं परमं पवित्रं
शिवं प्रकाशकरुणामृतसागरं तम् ॥३॥

जटाजूटसमायुक्तं सस्मितं भास्करप्रभम्।
आकृष्टेश्वरचिन्त्यं च भजेऽहं शङ्करं प्रभुम् ॥४॥

शिवो रक्षतु मां नित्यं चण्डीशं सर्वतः प्रभुम्।
नखाङ्कितदिगम्बरं नीलकण्ठं नतं भजे ॥५॥

अव्यादग्नितटित्तुल्यजटाटोपशिखण्डजः।
गलेऽव्याद्बस्मभूषाङ्गो मुखं व्यालास्यमालिनः ॥६॥

नेत्रे व्याद्दिनकान्ताभं कर्णौ व्यालकृपाणधरः।
नासिकां शूलपाणिश्च जिह्वां व्याद्बस्मभूषणः ॥७॥

कण्ठं व्याद्गिरीशश्च स्कन्धौ व्याद्वृषवाहनः।
भुजौ व्यालधरः पातु हस्तौ व्याद्बलविक्रमः ॥८॥

हृदयं व्याद्गिरीन्द्रश्च उदरं व्यालयज्ञसूः।
नाभिं व्याद्गुणगम्भीरो गृहीतोऽव्याजयाजकः ॥९॥

कटिं व्याद्मृगवक्त्रश्च ऊरू व्याद्बलविक्रमः।
जानुनी व्यालकण्ठश्च जङ्घे व्यालिविभूषणः ॥१०॥

गुल्फौ व्याद्बस्मनिलयः पादौ व्यालकृपाणधरः।
सर्वाङ्गं मे सदा पातु नीलकण्ठः शिवः प्रभुः ॥११॥

इत्येतत्कवचं पुण्यं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
सर्वपापविनिर्मुक्तः स शिवलोके महीयते ॥१२॥

॥ इति श्रीरुद्रयामले याज्ञवल्क्यनारदसंवादे शिवरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

इस स्तोत्र का इतिहास और उत्पत्ति क्या है?

शिव रक्षा स्तोत्र का उल्लेख वैदिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ यह बताया गया है कि भगवान नारायण ने इसे स्वप्न में महर्षि याज्ञवल्क्य को प्रकट किया था। इस स्तोत्र में भगवान शिव के विभिन्न नामों और रूपों का वर्णन करते हुए शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है, जिससे यह एक आध्यात्मिक कवच बन जाता है। इसका पाठ साधक को चारों पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की सिद्धि में सहायक होता है।

इस स्तोत्र का सर्वोत्तम समय क्या है?

यद्यपि शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन सोमवार, प्रदोष काल (शाम 6:00 से 7:30 बजे) और महाशिवरात्रि के दिन इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इन समयों में भगवान शिव की पूजा और स्तोत्र का पाठ साधक को विशेष लाभ प्रदान करता है।​

इस स्तोत्र को कौन पढ़ सकता है?

शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कोई भी श्रद्धालु कर सकता है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या वृद्ध। यह स्तोत्र सभी के लिए समान रूप से लाभकारी है, और इसे पढ़ने के लिए किसी विशेष योग्यता या दीक्षा की आवश्यकता नहीं है।​

इस स्तोत्र के लाभ क्या है?

शिव रक्षा स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जो साधक को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसका नियमित पाठ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करता है, और साधक को शिव सायुज्य की प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

बीज मंत्र

  • “ॐ नमः शिवाय”
  • “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं नमः शिवाय”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1.प्रश्न: शिव रक्षा स्तोत्र क्या है और इसका पाठ क्यों करना चाहिए?

उत्तर: शिव रक्षा स्तोत्र एक शक्तिशाली संस्कृत रचना है जिसे महर्षि याज्ञवल्क्य ने भगवान शिव की कृपा से रचा था। इसका पाठ करने से साधक को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है। नकारात्मक शक्तियों, रोगों, भय और बाधाओं से रक्षा होती है तथा जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।

2.प्रश्न: शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ने का सबसे शुभ समय क्या है?

उत्तर: शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल, संध्या समय या प्रदोष काल (शाम 6:00 से 7:30 बजे के बीच) करना सबसे उत्तम माना जाता है। विशेषतः सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन इसका पाठ अत्यधिक पुण्यदायक होता है। परन्तु श्रद्धा के साथ इसे किसी भी समय पढ़ा जा सकता है।

3.प्रश्न: क्या कोई भी व्यक्ति शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कर सकता है?

उत्तर: हाँ, कोई भी श्रद्धालु — चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, बालक हो या वृद्ध — शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कर सकता है। इसके लिए किसी विशेष दीक्षा या पूजन विधि की आवश्यकता नहीं है। केवल श्रद्धा, विश्वास और पवित्रता के साथ पाठ करना आवश्यक है।

4.प्रश्न: शिव रक्षा स्तोत्र पाठ के दौरान कौन-कौन से बीज मंत्रों का उच्चारण किया जा सकता है?

उत्तर: शिव रक्षा स्तोत्र के साथ निम्नलिखित बीज मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है:

“ॐ नमः शिवाय”

“ॐ ह्रीं नमः शिवाय”

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं नमः शिवाय”

5.प्रश्न: शिव रक्षा स्तोत्र के पाठ से साधक को क्या विशेष लाभ मिलते हैं?

उत्तर:शिव रक्षा स्तोत्र के नियमित पाठ से साधक को दुर्घटनाओं से रक्षा, रोगों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय, भय का नाश, तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। साधक का मन शांत रहता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा मोक्ष की दिशा में प्रगति होती है।


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