बुध स्तोत्रम् भगवान बुध (Mercury) को समर्पित एक वैदिक स्तुति है, जो विशेष रूप से बुध ग्रह के दोषों को शांत करने, बुद्धि-वाणी सुधारने, और व्यापार में सफलता प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र बुधदेव की कृपा पाने का एक प्रभावशाली माध्यम है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त है जिनकी कुंडली में बुध कमजोर या पीड़ित हो। इसके पाठ से स्मरण शक्ति, तार्किक क्षमता, संवाद कौशल और बुद्धिमत्ता में वृद्धि होती है। यह विद्यार्थी, व्यापारी, लेखक, वक्ता और वकीलों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
बुध स्तोत्रम्
प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ।।
सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित: ।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम ।।
उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति: ।
सूर्यप्रियकरोविद्वान पीडां हरतु मे बुधं ।।
शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन: ।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ।।
श्याम: शिरालश्चकलाविधिज्ञ:, कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्या-दाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र:।।
अहो चन्द्रासुत श्रीमन मागधर्मासमुदभव: ।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक: ।।
गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित: ।
केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित: ।।
ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज: ।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन: ।।
गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा ।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।।
एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर: ।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीडा न जायते ।।


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