नृसिंह स्तोत्र – Narsingh Stotra

नृसिंह स्तोत्र भगवान विष्णु के उग्र अवतार, श्री नृसिंह देव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो भक्तों को भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति से मुक्ति दिलाता है। इसका नियमित पाठ आत्मबल, साहस और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) में इसका जाप अत्यंत फलदायी होता है।

श्रीमच्छङ्कराचार्य जी द्वारा प्रतिपादित यह स्तोत्र है । इस स्तुति में तेरह श्लोकों के माध्यम से भगवान् लक्ष्मीनृसिंह स्वरूप की दिव्य स्तुति की गयी है । भगवान् लक्ष्मीनृसिंह के इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा उसके दुःख और दारिद्रयों का शमन होता है ।

Narsingh Stotra
नृसिंह स्तोत्र

श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे
  भोगीन्द्रभोगमणिरञ्जितपुण्यमूर्ते।
योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत    
              लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।१।।

ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि-
            सङघट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त।
लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस
             लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।२।।

संसारघोरगहने चरतो मुरारे
                   मारोग्रभीकरमृगप्रवरार्दितस्य।
आर्तस्य मत्सरनिदाघनिपीडितस्य
                   लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।३।।

संसारकूपमतिघोरमगाधमूलं
              सम्प्राप्य दुःखशतसर्पसमाकुलस्य।
दीनस्य देव कृपणापदमागतस्य
              लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।४।।

संसारसागरविशालकरालकाल-
नक्रग्रहग्रसननिग्रहविग्रहस्य।
व्यग्रस्य रागरसनोर्मिनिपीडितस्य
             लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।५।।

संसारवृक्षमघबीजमनन्तकर्म-
                 शाखाशतं करणपत्रमनङ्गपुष्पम्।
आरुह्य दुःखफलितं पततो दयालो
                 लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।६।।

संसारसर्पघनवक्त्रभयोग्रतीव्र-
                    दंष्ट्राकरालविषदग्धविनष्टमूर्तेः।
नागारिवाहन सुधाब्धिनिवास शौरे
                   लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।७।।

संसारदावदहनातुरभीकरोरु-
               ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य।
त्वत्पादपद्मसरसीशरणागतस्य
                लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।८।।

संसारजालपतितस्य जगन्निवास
              सर्वेन्द्रियार्तबडिशार्थझषोपमस्य।
प्रोत्खण्डितप्रचुरतालुकमस्तकस्य
               लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।९।।

संसारभीकरकरीन्द्रकराभिघात-
                निष्पिष्टमर्मवपुषः सकलार्तिनाश।
प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्य
                लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।१०।।

अन्धस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य 
                चोरैः प्रभो बलिभिरिन्द्रियनामधेयैः।
मोहान्धकूपकुहरे विनिपातितस्य
                लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।।११।।

लक्ष्मीपते कमलनाभ सुरेश विष्णो
                   वैकुण्ठ कृष्ण मधुसूदन पुष्कराक्ष।
ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव
                   देवेश देहि कृपणस्य करावलम्बम्।।१२।।

यन्माययोर्जितवपुः प्रचुरप्रवाह-
                  मग्नार्थमत्र निवहोरुकरावलम्बम्।
लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुव्रतेन 
                   स्तोत्रं कृतं सुखकरं भुवि शङ्करेण।।१३।।

इस स्तोत्र को पढ़ने का सबसे अच्छा समय क्या है?

नृसिंह स्तोत्र का पाठ ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) में करना सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इस समय मन शांत और एकाग्र होता है। इसके अतिरिक्त, मंगलवार और शनिवार के दिन, विशेषकर संकट के समय, इसका पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।

यह स्तोत्र कौन-कौन पढ़ सकता है?

नृसिंह स्तोत्र का पाठ कोई भी श्रद्धालु कर सकता है, चाहे वह गृहस्थ हो, विद्यार्थी हो या साधक। विशेष रूप से वे लोग जो भय, शत्रु बाधा, मानसिक तनाव या आध्यात्मिक सुरक्षा की आवश्यकता महसूस करते हैं, इस स्तोत्र का पाठ करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

बीज मंत्र

  • उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
  • क्ष्रौं

नृसिंह स्तोत्र के लाभ क्या हैं?

  • भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति।
  • मानसिक शांति, आत्मबल और साहस में वृद्धि।
  • ग्रह दोषों और बुरी नजर से सुरक्षा।
  • आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति।
  • घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नृसिंह स्तोत्र किस देवता को समर्पित है?
यह स्तोत्र भगवान विष्णु के उग्र रूप, श्री नृसिंह अवतार को समर्पित है।

2. नृसिंह स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) और संकट के समय, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

3. क्या नृसिंह स्तोत्र से शत्रु बाधा समाप्त हो सकती है?
हाँ, यह स्तोत्र शत्रुओं से रक्षा, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और मानसिक बल प्रदान करता है।

4. क्या कोई भी व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है?
जी हाँ, कोई भी श्रद्धालु — चाहे वह गृहस्थ हो, विद्यार्थी या साधक — इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।

5. इसमें कौन-कौन से बीज मंत्र शामिल हैं?
मुख्य बीज मंत्र हैं:

  • “क्ष्रौं”
  • “उग्रं वीरं महाविष्णुं.


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