“बजरंग की कैंची” एक लोकप्रिय और पारंपरिक हिंदू तांत्रिक मन्त्र है, जो मुख्य रूप से हनुमान जी से संबंधित है। इसे शत्रु बाधा निवारण, तांत्रिक प्रहार से सुरक्षा, और वाणी या व्यवहार से सामने वाले को शांत करने या ‘स्तम्भित’ करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Bajrang ki Kainchi
बजरंग की कैंची
फजले बिस्मिल्ला रहमान,
अटल खुरसी तेज खुरान ।
घड़ी-घड़ी में निकलै बान ।
लालो लाल कमान,
राखवाले की जबान ।
खाक माता खाक पिता ।
त्रिलोकी की मिसैली ।
राजा – प्रजा पड़ैमोहिनी ।
जल देखै, थल कतरै ।
राजा इन्द्र की आसन कतरै ।
तलवार की धार कतरै ।
आकाश पाताल,
वायु – मण्डल को कतरै ।
तेंतीस कोटि देवी- देवताओं को कतरै ।
शिव – शंकर को कतरै ।
भीमसेन की गदा कतरै ।
अर्जुन को बाण कतरै ।
कृष्ण को सुदर्शन कतरै ।
सोला हंसा को कतरै ।
पेट में के बावरे को कतरै ।
दौलतपुर के डोमा को कतरै ।
ब्राह्मण के ब्रहम-राक्षस को कतरै ।
धोबी के जिन को कतरै ।
भंगी के जिन को कतरै ।
रमाने के जिन को कतरै ।
मसान के जिन को कतरै ।
मेरे नरसिंह से कतरै ।
गुरु के नरसिंह से कतरै ।
बैलातन चुड़ैल को कतरै ।
जहाँ खुरी नौ खण्ड,
बारह बंगाले की विद्या जा पहुँचे ।
अञ्जनी के पूत हनुमान |
तोहे एक लाख अस्सी हजार पीर-पैगम्बरों की
दुहाई, दुहाई, दुहाई |



