एकादशी व्रत 2025
एकादशी व्रत हर 15 दिनों में आती है और हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह चंद्र मास के 11वें दिन (अमावस्या या पूर्णिमा से पहले) पड़ती है। इसे “शुक्ल पक्ष” और “कृष्ण पक्ष” की एकादशी के रूप में मनाया जाता है। शुक्ल पक्ष की एकादशी चांद बढ़ने के समय और कृष्ण पक्ष की एकादशी चांद घटने के समय आती है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना और व्रत रखना शुभ माना जाता है। व्रत में चावल और अनाज नहीं खाया जाता क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है। सूर्योदय से अगले दिन पारण के समय तक व्रत रखा जाता है, और तभी व्रत पूर्ण होता है।
यह व्रत पापों से मुक्ति, मन की शांति और भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है। अगर सही समय पर व्रत और पूजा की जाए, तो यह भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी कर सकता है।
यदि आप व्रत रखते हैं, तो पंचांग देखकर एकादशी की तिथि, आरंभ और पारण समय ज़रूर जान लें।
2025 एकादशी व्रत कैलेंडर
| एकादशी का नाम | तिथि (शुरू) | तिथि (समाप्त) | पारण समय |
|---|---|---|---|
| पौष पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025, 12:22 PM | 10 जनवरी 2025, 10:19 AM | 11 जनवरी 2025, 06:48 AM से 08:12 AM |
| षट्तिला एकादशी | 24 जनवरी 2025, 07:25 PM | 25 जनवरी 2025, 08:31 PM | 26 जनवरी 2025, 06:50 AM से 08:14 AM |
| जया एकादशी | 7 फरवरी 2025, 09:26 PM | 8 फरवरी 2025, 08:15 PM | 9 फरवरी 2025, 06:44 AM से 08:10 AM |
| विजया एकादशी | 23 फरवरी 2025, 01:55 PM | 24 फरवरी 2025, 01:44 PM | 25 फरवरी 2025, 07:05 AM से 09:24 AM |
| आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025, 07:45 AM | 10 मार्च 2025, 07:44 AM | 11 मार्च 2025, 06:35 AM से 08:13 AM |
| पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025, 05:05 AM | 26 मार्च 2025, 03:45 AM | 26 मार्च 2025, 01:40 PM से 04:07 PM |
| कामदा एकादशी | 7 अप्रैल 2025, 08:00 PM | 8 अप्रैल 2025, 09:12 PM | 9 अप्रैल 2025, 06:01 AM से 08:34 AM |
| वरुथिनी एकादशी | 23 अप्रैल 2025, 04:43 PM | 24 अप्रैल 2025, 02:32 PM | 25 अप्रैल 2025, 06:11 AM से 08:46 AM |
| मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025, 10:19 AM | 8 मई 2025, 12:29 PM | 9 मई 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| अपरा एकादशी | 23 मई 2025, 01:12 AM | 23 मई 2025, 10:29 PM | 24 मई 2025, 05:55 AM से 08:36 AM |
| निर्जला एकादशी | 6 जून 2025, 02:15 AM | 7 जून 2025, 04:47 AM | 7 जून 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| योगिनी एकादशी | 21 जून 2025, 07:18 AM | 22 जून 2025, 04:27 AM | 22 जून 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| देवशयनी एकादशी | 5 जुलाई 2025, 06:58 PM | 6 जुलाई 2025, 09:14 PM | 7 जुलाई 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025, 12:12 PM | 21 जुलाई 2025, 09:38 AM | 22 जुलाई 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| श्रावण पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025, 11:41 AM | 5 अगस्त 2025, 01:12 PM | 6 अगस्त 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025, 05:22 PM | 19 अगस्त 2025, 03:32 PM | 20 अगस्त 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| परिवर्तिनी एकादशी | 2 सितम्बर 2025, 01:00 PM | 3 सितम्बर 2025, 02:30 PM | 4 सितम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| इंदिरा एकादशी | 16 सितम्बर 2025, 11:00 AM | 17 सितम्बर 2025, 12:30 PM | 18 सितम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| पाशांकुशा एकादशी | 2 अक्टूबर 2025, 10:00 AM | 3 अक्टूबर 2025, 11:30 AM | 4 अक्टूबर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| रमा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025, 09:00 AM | 17 अक्टूबर 2025, 10:30 AM | 18 अक्टूबर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| देवउठनी एकादशी | 1 नवम्बर 2025, 08:00 AM | 2 नवम्बर 2025, 09:30 AM | 3 नवम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| उत्पन्ना एकादशी | 14 नवम्बर 2025, 07:00 AM | 15 नवम्बर 2025, 08:30 AM | 16 नवम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| मोक्षदा एकादशी | 30 नवम्बर 2025, 06:00 AM | 1 दिसम्बर 2025, 07:30 AM | 2 दिसम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
| सफला एकादशी | 14 दिसम्बर 2025, 05:00 AM | 15 दिसम्बर 2025, 06:30 AM | 16 दिसम्बर 2025, 06:00 AM से 08:30 AM |
एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, सत्ययुग में मुचुकुंद नामक राजा ने स्वर्गलोक की प्राप्ति के लिए कठोर तप किया। उनके कुल में एक राक्षस उत्पन्न हुआ जिसका नाम मुर था। वह देवताओं को परेशान करता और सभी लोकों में आतंक फैलाता।
भगवान विष्णु ने मुर का वध करने का निश्चय किया। एक गुफा में जब विष्णु विश्राम कर रहे थे, मुर ने उन पर हमला करने का प्रयास किया। तभी भगवान की नाभि से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — वह शक्ति एक देवी थी। उस देवी ने मुर का वध कर दिया।
विष्णुजी ने जब यह देखा, तो अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने उस देवी को वरदान दिया कि वह तिथि (जिस दिन मुर मारा गया) “एकादशी” के नाम से जानी जाएगी और उस दिन जो व्रत करेगा, वह पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करेगा।
एकादशी व्रत के नियम
- व्रत की पूर्व रात्रि से सात्विक भोजन करें, तामसिक भोजन त्यागें।
- प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें।
- दिनभर फलाहार करें या निर्जल उपवास रखें।
- श्रीहरि का स्मरण, भगवद्गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- अगले दिन पारण के समय व्रत खोलें।
एकादशी व्रत के लाभ
- व्रत से चित्त शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- स्वास्थ्य में सुधार आता है, क्योंकि यह एक तरह का डिटॉक्स भी है।
- भगवान विष्णु की कृपा से सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- पापों का नाश होता है और आत्मा को शांति मिलती है।
एकादशी व्रत आरती
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे
जो ध्यावे फल पावे,
दुख विनसे मन का।
स्वामी दुख विनसे मन का,
सुख संपत्ति घर आवे॥ॐ जय जगदीश हरे
मात-पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी,
तुम बिन और न दूजा॥ ॐ जय जगदीश हरे
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी,
पारब्रह्म परमेश्वर॥ ॐ जय जगदीश हरे
आरती तेरी जो गावे,
फल पावे मन चाहा।
स्वामी फल पावे मन चाहा,
मनवांछित फल पावे॥ॐ जय जगदीश हरे
प्रार्थना:
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥
एकादशी व्रत: सामान्य प्रश्नोत्तर (FAQs)
प्रश्न: क्या एकादशी व्रत तिथि के आरंभ से शुरू करना चाहिए या सूर्योदय से?
उत्तर: एकादशी व्रत का आरंभ स्थानीय सूर्योदय से करना चाहिए, न कि तिथि के प्रारंभ समय से। व्रत सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक चलता है। पारण (व्रत तोड़ने) का समय अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित होता है, जो दोपहर तक भी हो सकता है।
प्रश्न: एकादशी व्रत के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर: एकादशी व्रत के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और श्रद्धा पर निर्भर करते हैं:
- निर्जला व्रत
- फलाहारी व्रत
- नक्तभोजी व्रत
- क्षीराहारी व्रत
प्रश्न: एकादशी व्रत में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ वर्जित हैं?
उत्तर: व्रत के दिन निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित है:
- अनाज (चावल, गेहूं, मक्का आदि)
- दालें और बीन्स
- मसूर, चना, उड़द आदि
- लहसुन, प्याज, और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थ
- मांस, मछली, अंडा, शराब आदि
सात्विक भोजन जैसे फल, दूध, मेवे, और साबूदाना का सेवन किया जा सकता है।
प्रश्न: यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण उपवास संभव न हो तो क्या करें?
उत्तर: यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण उपवास संभव न हो, तो फलाहारी या नक्तभोजी व्रत का पालन किया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि व्रत श्रद्धा और भक्ति से किया जाए।
प्रश्न: एकादशी व्रत के दौरान कौन-कौन से कार्य वर्जित हैं?
उत्तर: व्रत के दिन निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:
झूठ बोलना, क्रोध करना, और विवाद करना
नींद में अधिक समय बिताना
तामसिक गतिविधियाँ जैसे मांसाहार, मद्यपान आदि
बाल, नाखून, या दाढ़ी काटना
तेल मालिश या स्नान करना
इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
प्रश्न: एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए?
उत्तर: व्रत का पारण अगले दिन (द्वादशी) के सूर्योदय के बाद, निर्धारित समय के भीतर करना चाहिए। पारण के समय भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए सात्विक भोजन से व्रत तोड़ना चाहिए।
प्रश्न: क्या महिलाएं एकादशी व्रत रख सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएं भी एकादशी व्रत रख सकती हैं। यदि गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं, तो उन्हें अपने स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का प्रकार चुनना चाहिए, जैसे फलाहारी व्रत।
प्रश्न: एकादशी व्रत के आध्यात्मिक लाभ क्या हैं?
उत्तर: एकादशी व्रत से मन की शुद्धि, आत्म-संयम, और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और पापों का नाश करता है।
2024 एकादशी व्रत कैलेंडर
| एकादशी व्रत | तिथि (शुरू) | तिथि (समाप्त) | पारण समय |
|---|---|---|---|
| पौष पुत्रदा एकादशी | 10 जनवरी 2024, रात 09:21 | 11 जनवरी 2024, रात 11:04 | 12 जनवरी 2024, सुबह 06:48 से 08:12 |
| षट्तिला एकादशी | 24 जनवरी 2024, सुबह 06:12 | 25 जनवरी 2024, सुबह 07:49 | 26 जनवरी 2024, सुबह 06:50 से 08:14 |
| जया एकादशी | 8 फरवरी 2024, दोपहर 01:04 | 9 फरवरी 2024, दोपहर 02:30 | 10 फरवरी 2024, सुबह 06:44 से 08:10 |
| विजया एकादशी | 23 फरवरी 2024, शाम 07:18 | 24 फरवरी 2024, शाम 08:25 | 25 फरवरी 2024, सुबह 06:35 से 08:00 |
| आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2024, सुबह 04:26 | 10 मार्च 2024, सुबह 06:05 | 11 मार्च 2024, सुबह 06:30 से 08:00 |
| पापमोचनी एकादशी | 24 मार्च 2024, रात 01:28 | 25 मार्च 2024, रात 03:05 | 26 मार्च 2024, सुबह 06:15 से 08:05 |
| कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2024, शाम 06:40 | 9 अप्रैल 2024, शाम 07:15 | 10 अप्रैल 2024, सुबह 06:05 से 07:55 |
| वरुथिनी एकादशी | 22 अप्रैल 2024, सुबह 07:18 | 23 अप्रैल 2024, सुबह 08:22 | 24 अप्रैल 2024, सुबह 06:00 से 07:50 |

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