काली हृदय स्तोत्र (Kali Hridaya Stotra) एक अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमय तांत्रिक स्तोत्र है, जो माँ काली के हृदयतत्त्व यानी आंतरिक, गूढ़ और मूल शक्तिरूप की स्तुति करता है। यह स्तोत्र साधक को माँ काली के हृदय में प्रवेश कराकर उनकी अनुग्रह शक्ति, रक्षा, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
Kali Hridaya Stotram
कालिका हृदय स्तोत्र
हं हं हं हंस हंसी स्मित कह कह चामुक्त घोराट्टहासा ।
खं खं खं खड्गहस्ते त्रिभुवननिलये कालिका कालधारी ॥१॥
रं रं रं रंग-रंगी प्रमुदितवदने पिङ्गकेशी श्मशाने ।
यं रं लं तापनीये भ्रुकुटि घट घटाटोप टङ्कार जापे ॥२॥
हं हं हंकारनादं नरपिशितमुखी संधिनी साधुदेवी ।
ह्रीं ह्रीं कूष्मांडमुण्डी वर वर ज्वलिनी पिंगकेशी कृशांगी ॥३॥
खं खं खं भूतनाथे किलि किलि किलिके एहि एहि प्रचण्डे ।
ह्रूं ह्रूं ह्रूं भूतनाथे सुरगण नमिते मातरम्बे नमस्ते ॥४॥
भां भां भां भाव भावैर्भय हन हनितं भुक्ति मुक्ति प्रदात्री ।
भीं भीं भीं भीमकाक्षिर्गुण गुणित गुहावास भोगी स भोगी ॥५॥
भूं भूं भूं भमि कम्पे प्रलय च निरते तारयन्तं स्व नेत्रे ।
भें भें भें भेदनीये हरतु मम भयं कालिके ! त्वां नमस्ते ॥६॥
॥ अथ फलश्रुतिः ॥
आयुः श्री वर्द्धनीये विपुल रिपु हरे सर्व सौभाग्य हेतुः ।
श्रीकाली शत्रुनाशे सकल सुखकरे सर्वकल्याणमूले ॥७॥
भक्त्या स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यदि जपति पुमानाशु सिद्धि लभन्ते ।
भूतप्रेतादिरण्ये त्रिभुवन वशिनी रूपिणी भूतियुक्ते ॥८॥
॥ इति श्रीकाली तन्त्रे कालिका हृदय स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥



