मंगला गौरी स्तोत्र – Mangla Gauri Stotram

मंगला गौरी स्तोत्र एक शक्तिशाली देवी स्तुति है जो विशेष रूप से देवी मंगला गौरी को समर्पित है। देवी मंगला गौरी माता पार्वती जी का ही मंगलमयी रूप हैं, जिन्हें सौभाग्य, समृद्धि, वैवाहिक सुख और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

Mangla Gauri Stotram
मंगला गौरी स्तोत्र

हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।

शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके॥

मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले।

सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये॥

पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।

पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्॥

मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।

संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्॥

देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।

प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे॥

तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।

वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने॥

मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।

इति मंगलागौरी स्तोत्रं सम्पूर्णं


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