भगवान नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् एक पारंपरिक वैदिक स्तुति है जिसमें भगवान नृसिंह के 108 पवित्र नामों का उल्लेख होता है। यह स्तोत्र विष्णु के उग्र और रक्षक स्वरूप, भगवान नृसिंह को समर्पित है, जो अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए आधे मानव और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए थे।
Narsingh Ashtottar Shatnam Stotram
नृसिंह अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
श्रीनृसिंहो महासिंहो दिव्यसिंहो महाबलः।
उग्रसिंहो महादेव उपेन्द्रश्चाऽग्निलोचनः॥1॥
रौद्रश्शौरिर्महावीरस्सुविक्रम-पराक्रमः।
हरिकोलाहलश्चक्री विजयश्चाजयोऽव्ययः॥2॥
दैत्यान्तकः परब्रह्माप्यघोरो घोरविक्रमः।
ज्वालामुखो ज्वालमाली महाज्वालो महाप्रभुः॥3॥
निटिलाक्षः सहस्राक्षो दुर्निरीक्ष्यः प्रतापनः।
महादंष्ट्रायुधः प्राज्ञो हिरण्यकनिषूधनः॥4॥
चण्डकोपी सुरारिघ्नस्सदार्तिघ्न-सदाशिवः।
गुणभद्रो महाभद्रो बलभद्रस्सुभद्रकः॥5॥
कराळो विकराळश्च गतायुस्सर्वकर्तृकः।
भैरवाडंबरो दिव्यश्चागम्यस्सर्वशत्रुजित्॥6॥
अमोघास्त्रश्शस्त्रधरः सव्यजूटस्सुरेश्वरः।
सहस्रबाहुर्वज्रनखस्सर्वसिद्धिर्जनार्दनः॥7॥
अनन्तो भगवान् स्थूलश्चागम्यश्च परावरः।
सर्वमन्त्रैकरूपश्च सर्वयन्त्रविधारणः॥8॥
अव्ययः परमानन्दः कालजित् खगवाहनः।
भक्तातिवत्सलोऽव्यक्तस्सुव्यक्तस्सुलभश्शुचिः॥9॥
लोकैकनायकस्सर्वश्शरणागतवत्सलः।
धीरो धरश्च सर्वज्ञो भीमो भीमपराक्रमः॥10॥
देवप्रियो नुतः पूज्यो भवहृत् परमेश्वरः।
श्रीवत्सवक्षाः श्रीवासो विभुस्सङ्कर्षणः प्रभुः॥11॥
त्रिविक्रमस्त्रिलोकात्मा कामस्सर्वेश्वरेश्वरः।
विश्वंभरः स्थिराभश्चाऽच्युतः पुरुषोत्तमः॥12॥
अधोक्षजोऽक्षयस्सेव्यो वनमाली प्रकंपनः।
गुरुर्लोकगुरुस्स्रष्टा परंज्योतिः परायणः॥13॥
ज्वालाहोबिलमालोल-करोडाकारञ्जभार्गवाः।
योगनन्दश्चत्रवटः पावनो॥14॥
॥ इति नृसिंहाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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