Shiv Pratah Smaran Stotra

Shiv Pratah Smaran Stotram एक स्तुति है जिसमें भगवान शिव के दिव्य रूप, उनके गुणों और उनकी कृपा का स्मरण प्रातःकाल किया जाता है। यह स्तोत्र प्राचीन संत आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। इसमें भगवान शिव की सौम्यता, करुणा, ज्ञान, और उनके भक्तों पर कृपा को बड़े सुंदर शब्दों में वर्णित किया गया है।


शिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम

प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।

खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥१॥

प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् ।

विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥२॥

प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम् ।

नामादिभेदरहितं षड्भावशून्यं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥३॥


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