Category: Stotram

  • Brihaspati

    Brihaspati Stotram

    Brihaspati Stotram” देवताओं के गुरु बृहस्पति जी को समर्पित पवित्र स्तोत्र है। इसे पढ़ने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और साधक को विद्या, बुद्धि और वाणी की शुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह स्तोत्र जीवन में अच्छे मार्गदर्शन, सम्मान और आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाने के लिए पढ़ा जाता है। गुरु ग्रह कमजोर होने पर शिक्षा,…

  • Karthaveeryarjuna Stotram

    Karthaveeryarjuna Stotram

    Karthaveeryarjuna Stotram भगवान कार्तवीर्य अर्जुन को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। कार्तवीर्य अर्जुन को सहस्रार्जुन के नाम से भी जाना जाता है — वे सहस्र बाहु वाले महान राजा थे जो अपने अद्भुत सामर्थ्य, ऐश्वर्य और न्यायप्रिय शासन के लिए प्रसिद्ध हैं। इस स्तोत्र के पाठ से साधक को धन-संपत्ति, भूमि विवादों से मुक्ति और…

  • Sri Padmavati Stotram

    Sri Padmavati Stotram

    Sri Padmavati Stotramश्रीपद्मावतीसहस्रनामस्तोत्रम् अथ पद्मावतीशतम् । प्रणम्य परया भक्त्या देव्याः पादाम्बुजां त्रिधा ।नामान्यष्टसहस्राणि वक्तुं तद्भक्तिहेतवे ॥ १॥ श्रीपार्श्वनाथचरणाम्बुजचञ्चरीकाभव्यान्धनेत्रविमलीकरणे शलाका ।नार्गेद्रप्राणधरणीधरधारणाभृत्मां पातु सा भगवती नितरामघेभ्यः ॥ २॥ ॐ पद्मावती पद्मवर्णा पद्महस्तापि पद्मिनी ।पद्मासना पद्मकर्णा पद्मास्या पद्मलोचना ॥ ३॥ पद्मा पद्मदलाक्षी च पद्मी पद्मवनस्थिता ।पद्मालया पद्मगन्धा पद्मरागोपरागिका ॥ ४॥ पद्मप्रिया पद्मनाभिः पद्माङ्गा पद्मशायिनी ।पद्मवर्णवती पूता पवित्रा पापनाशिनी…

  • Chandra Stotram

    Chandra Stotram

    Chandra Stotramचन्द्र स्तोत्र श्वेताम्बर: श्वेतवपु: किरीटी, श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहु: । चन्द्रो मृतात्मा वरद: शशांक:, श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देव: ।।1।।  दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम ।  नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम ।।2।। क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणी सहित: प्रभु: । हरस्य मुकुटावास: बालचन्द्र नमोsस्तु ते ।।3।। सुधायया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम । सर्वान्नरसहेतुं तं नमामि सिन्धुनन्दनम ।।4।। राकेशं तारकेशं च रोहिणीप्रियसुन्दरम । ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहु: ।।5।।…

  • Ram Raksha Stotram

    Ram Raksha Stotram

    Ram Raksha Stotramराम रक्षा स्तोत्र:  श्रीगणेशायनम: । अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: । श्रीसीतारामचंद्रोदेवता । अनुष्टुप् छन्द: । सीता शक्ति: । श्रीमद्‌हनुमान् कीलकम् । श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥ ॥ अथ ध्यानम् ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्‌मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥ वामाङ्‌कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम् ॥ ॥ इति ध्यानम् ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥ ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं…

  • Neelkanth

    Neelkanth Stotra

    Neelkanth Stotraनीलकंठ स्तोत्र विनियोग – ॐ अस्य श्री भगवान नीलकंठ सदा-शिव-स्तोत्र मंत्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्ठुप छन्दः, श्री नीलकंठ सदाशिवो देवता, ब्रह्म बीजं, पार्वती शक्तिः, मम समस्त पाप क्षयार्थंक्षे म-स्थै-आर्यु-आरोग्य-अभिवृद्धयर्थं मोक्षादि-चतुर्वर्ग-साधनार्थं च श्री नीलकंठ-सदाशिव-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यास – श्री ब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि। अनुष्टुप छन्दसेनमः मुखे। श्री नीलकंठ सदाशिव देवतायै नमः हृदि। ब्रह्म बीजाय नमः…

  • Radha Stotram

    Radha Kripa Kataksh Stotram

    Sri Radha Kripa Kataksh Stotramश्री राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी।व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (१) अशोकवृक्ष वल्लरी वितानमण्डपस्थिते, प्रवालज्वालपल्लव प्रभारूणाङि्घ् कोमले।वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (२) अनंगरंगमंगल प्रसंगभंगुरभ्रुवां, सुविभ्रम ससम्भ्रम दृगन्तबाणपातनैः।निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्॥ (३) तड़ित्सुवणचम्पक प्रदीप्तगौरविगहे, मुखप्रभापरास्त-कोटिशारदेन्दुमण्ङले।विचित्रचित्र-संचरच्चकोरशावलोचने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्॥ (४) मदोन्मदातियौवने…

  • Ashtalakshmi Stotram

    Ashtalakshmi Stotram – अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम्

    Ashtalakshmi Stotramअष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम् आदिलक्ष्मिसुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहॊदरि हेममयेमुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते ।पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुतेजय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 1 ॥ धान्यलक्ष्मिअयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमयेक्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुतेजय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदापालय माम् [परिपालय माम्]…

  • Shiv Sahastra Naam

    Shiv Sahastra Naam Stotram

    “शिव सहस्रनाम” भगवान शिव के एक हजार पवित्र नामों की आराधना है, जिसके नियमित पाठ से उपासकों को आंतरिक शांति, कल्याण और सुरक्षा का अनुभव होता है। इसे घर पर शांत चित्त से भगवान शिव का स्मरण करते हुए किया जा सकता है, जिसके लिए किसी विशेष कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। भगवान शिव में…

  • Venkateswara Swamy

    Venkateswara Swamy Stotram

    Venkateswara Swamy Stotramश्रीवेङ्कटेशस्तोत्रम् कमलाकुचचूचुक कुङ्कुमतो नियतारुणितातुलनीलतनो ।कमलायतलोचन लोकपते विजयी भव वेङ्कटशैलपते ॥ १॥ सचतुर्मुखषण्मुखपंचमुखप्रमुखाखिलदैवतमौलिमणे ।शरणागतवत्सल सारनिधे परिपालय मां वृषशैलपते ॥ २॥ अतिवेलतया तव दुर्विषहै रनुवेलकृतैरपराधशतै।भरितं त्वरितं वृषशैलपते परया कृपया परिपाहि हरे ॥ ३॥ अधिवेङ्कटशैलमुदारमतेजनताभिमताधिकदानरतात् ।परदेवतया गदितान्निगमैः कमलादयितान्न परं कलये ॥ ४॥ कलवेणुरवावशगोपवधू शतकोटिवृतात्स्मरकोटिसमात् ।प्रतिवल्लविकाभिमतात्सुखदात् वसुदेवसुतान्न परं कलये ॥ ५॥ अभिरामगुणाकर दाशरथे जगदेकधनुर्धर धीरमते ।रघुनायक राम…