Mindblown: a blog about philosophy.
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Nava Naga Stotram – कालसर्प दोष, डरावने सपनों और ग्रह पीड़ा का चमत्कारी समाधान!
नव नागा स्तोत्रम एक पुराना वैदिक भजन है जिसमें अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबाला, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया सहित 9 प्रमुख नाग देवताओं की स्तुति की गई है। इस स्तोत्र का पाठ नाग दोष, कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और विभिन्न बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र बौद्धिक शांति,…
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Mahakal Stotram
Mahakal Stotram ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते ।महाकाल महायोगिन् महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ १॥ महाकाल महादेव महाकाल महाप्रभो ।महाकाल महारुद्र महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ २॥ महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोऽपहन् ।महाकाल महाकाल महाकाल नमोऽस्तु ते ॥ ३॥ भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः ।रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नमः ॥ ४॥ उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय…
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Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram
“Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram” भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका अर्थ होता है — ‘हे लक्ष्मी-नरसिंह, मुझे अपना हाथ देकर सहारा दो।’ यह स्तोत्र आचार्य शंकराचार्य द्वारा रचा गया माना जाता है और भक्त इसे दुख, भय और जीवन की कठिनाइयों से मुक्त होने के लिए पढ़ते हैं। जो…
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Brihaspati Stotram
Brihaspati Stotram” देवताओं के गुरु बृहस्पति जी को समर्पित पवित्र स्तोत्र है। इसे पढ़ने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और साधक को विद्या, बुद्धि और वाणी की शुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह स्तोत्र जीवन में अच्छे मार्गदर्शन, सम्मान और आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाने के लिए पढ़ा जाता है। गुरु ग्रह कमजोर होने पर शिक्षा,…
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Karthaveeryarjuna Stotram
Karthaveeryarjuna Stotram भगवान कार्तवीर्य अर्जुन को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। कार्तवीर्य अर्जुन को सहस्रार्जुन के नाम से भी जाना जाता है — वे सहस्र बाहु वाले महान राजा थे जो अपने अद्भुत सामर्थ्य, ऐश्वर्य और न्यायप्रिय शासन के लिए प्रसिद्ध हैं। इस स्तोत्र के पाठ से साधक को धन-संपत्ति, भूमि विवादों से मुक्ति और…
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Sri Padmavati Stotram
Sri Padmavati Stotramश्रीपद्मावतीसहस्रनामस्तोत्रम् अथ पद्मावतीशतम् । प्रणम्य परया भक्त्या देव्याः पादाम्बुजां त्रिधा ।नामान्यष्टसहस्राणि वक्तुं तद्भक्तिहेतवे ॥ १॥ श्रीपार्श्वनाथचरणाम्बुजचञ्चरीकाभव्यान्धनेत्रविमलीकरणे शलाका ।नार्गेद्रप्राणधरणीधरधारणाभृत्मां पातु सा भगवती नितरामघेभ्यः ॥ २॥ ॐ पद्मावती पद्मवर्णा पद्महस्तापि पद्मिनी ।पद्मासना पद्मकर्णा पद्मास्या पद्मलोचना ॥ ३॥ पद्मा पद्मदलाक्षी च पद्मी पद्मवनस्थिता ।पद्मालया पद्मगन्धा पद्मरागोपरागिका ॥ ४॥ पद्मप्रिया पद्मनाभिः पद्माङ्गा पद्मशायिनी ।पद्मवर्णवती पूता पवित्रा पापनाशिनी…
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Chandra Stotram
Chandra Stotramचन्द्र स्तोत्र श्वेताम्बर: श्वेतवपु: किरीटी, श्वेतद्युतिर्दण्डधरो द्विबाहु: । चन्द्रो मृतात्मा वरद: शशांक:, श्रेयांसि मह्यं प्रददातु देव: ।।1।। दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम । नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम ।।2।। क्षीरसिन्धुसमुत्पन्नो रोहिणी सहित: प्रभु: । हरस्य मुकुटावास: बालचन्द्र नमोsस्तु ते ।।3।। सुधायया यत्किरणा: पोषयन्त्योषधीवनम । सर्वान्नरसहेतुं तं नमामि सिन्धुनन्दनम ।।4।। राकेशं तारकेशं च रोहिणीप्रियसुन्दरम । ध्यायतां सर्वदोषघ्नं नमामीन्दुं मुहुर्मुहु: ।।5।।…
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Ram Raksha Stotram
Ram Raksha Stotramराम रक्षा स्तोत्र: श्रीगणेशायनम: । अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: । श्रीसीतारामचंद्रोदेवता । अनुष्टुप् छन्द: । सीता शक्ति: । श्रीमद्हनुमान् कीलकम् । श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥ ॥ अथ ध्यानम् ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥ वामाङ्कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम् ॥ ॥ इति ध्यानम् ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥ ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं…
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Neelkanth Stotra
Neelkanth Stotraनीलकंठ स्तोत्र विनियोग – ॐ अस्य श्री भगवान नीलकंठ सदा-शिव-स्तोत्र मंत्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्ठुप छन्दः, श्री नीलकंठ सदाशिवो देवता, ब्रह्म बीजं, पार्वती शक्तिः, मम समस्त पाप क्षयार्थंक्षे म-स्थै-आर्यु-आरोग्य-अभिवृद्धयर्थं मोक्षादि-चतुर्वर्ग-साधनार्थं च श्री नीलकंठ-सदाशिव-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यास – श्री ब्रह्मा ऋषये नमः शिरसि। अनुष्टुप छन्दसेनमः मुखे। श्री नीलकंठ सदाशिव देवतायै नमः हृदि। ब्रह्म बीजाय नमः…
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Radha Kripa Kataksh Stotram
Sri Radha Kripa Kataksh Stotramश्री राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी, प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी।व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (१) अशोकवृक्ष वल्लरी वितानमण्डपस्थिते, प्रवालज्वालपल्लव प्रभारूणाङि्घ् कोमले।वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (२) अनंगरंगमंगल प्रसंगभंगुरभ्रुवां, सुविभ्रम ससम्भ्रम दृगन्तबाणपातनैः।निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्॥ (३) तड़ित्सुवणचम्पक प्रदीप्तगौरविगहे, मुखप्रभापरास्त-कोटिशारदेन्दुमण्ङले।विचित्रचित्र-संचरच्चकोरशावलोचने, कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष भाजनम्॥ (४) मदोन्मदातियौवने…
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