Mindblown: a blog about philosophy.
-

तंत्र दोष शांति स्तोत्र – Tantra Dosh Shanti Stotra
तंत्र दोष शांति स्तोत्र एक धार्मिक/आध्यात्मिक प्रार्थना है जिसका उद्देश्य तंत्र संबंधी दोषों या बाधाओं को दूर करना और शांति स्थापित करना होता है। तंत्र का अर्थ है आध्यात्मिक विधि या अभ्यास, जिसमें मंत्र, यंत्र, पूजा, और साधना शामिल होती है। जब किसी व्यक्ति या स्थान में तंत्र दोष उत्पन्न होता है, तो यह नकारात्मक…
-
.jpg?resize=1075,716&ssl=1)
ज्वर शांति स्तोत्र – Jwar Shanti Stotra
ज्वर शांति स्तोत्र एक प्राचीन वैदिक स्तोत्र है जो विशेष रूप से ज्वर (बुखार) और अन्य तापजनित रोगों की शांति और निवारण के लिए पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र वैदिक ऋचाओं और श्लोकों का एक संकलन है जिसमें आग्नि, सोम, औषधि और सूर्य जैसे देवताओं का आवाहन कर रोगशांति की प्रार्थना की जाती है। Jwar…
-
.jpg?resize=1075,716&ssl=1)
जटायु कृत श्री राम स्तोत्र – Jatayu Krit Shree Ram Stotram
जटायुकृत श्रीराम स्तोत्र एक स्तुतिपरक स्तोत्र है जो भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करता है और यह माना जाता है कि इसे महाभक्त पक्षिराज जटायु ने श्रीराम की स्तुति करते हुए कहा था। यह स्तोत्र श्रीराम के दिव्य गुणों, उनके धर्मपरायण स्वरूप, करुणा, वीरता और भक्तवत्सलता की भावपूर्ण स्तुति है। Jatayu Krit Shree Ram…
-

चर्पट पंजरिका स्तोत्रम् – Charpat Panjarika Stotram
चर्पट पंजरिका स्तोत्रम् (Charpat Panjarika Stotram) आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और सारगर्भित वैराग्यप्रद स्तोत्र है। इसे सामान्यतः “भज गोविंदम्” या “मोहमुद्गरः” के नाम से भी जाना जाता है। Charpat Panjarika Stotramचर्पट पंजरिका स्तोत्रम् दिनमपि रजनी सायं प्रात: शिशिरवसन्तौ पुनरायात: ।काल: क्रीडति गच्छत्यायुस्तदपि न मुच्चत्याशावायु: ।। १ ।।भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं…
-
Chandra Stotra
चन्द्र स्तोत्र चन्द्र स्तोत्र एक पवित्र वैदिक स्तुति है जो चन्द्रदेव (चाँद) को समर्पित है। इसे पाठ करने का उद्देश्य मन की शांति, सौम्यता, मानसिक संतुलन, और सौभाग्य की प्राप्ति होता है। चन्द्रमा को मन का अधिपति (Mind Controller) माना गया है, और वह जीवन में शीतलता, कलात्मकता, प्रेम, भावनाओं और कल्पनाशक्ति का प्रतीक है।…
-

चतुःश्लोकी भागवत – Chatushloki Bhagwat
चतुःश्लोकी भागवत (Chatushloki Bhagavat) भागवत पुराण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने सिर्फ चार श्लोकों में सम्पूर्ण भागवत तत्वज्ञान का सार ब्रह्मा जी को प्रदान किया है। इसे “भागवत का बीज” भी कहा जाता है, क्योंकि इसी में संपूर्ण श्रीमद्भागवत की भावनात्मक और दार्शनिक जड़ें छिपी हैं। Chatushloki Bhagwatचतुःश्लोकी भागवत अहमेवासमेवाग्रे…
-

चतुःश्लोकी स्तोत्र – Chatushloki Stotra
चतुःश्लोकी स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली और सारगर्भित स्तोत्र है जो भगवान विष्णु (या कभी-कभी देवी लक्ष्मी) की स्तुति में रचा गया है। यह केवल चार श्लोकों में ही ब्रह्मज्ञान, भक्ति और वैदिक दर्शन का सार प्रस्तुत करता है। इसे भगवत गीता या भागवत पुराण से संबंधित गूढ़ ज्ञान के रूप में भी माना जाता है।…
-

चक्र राज स्तोत्र – Chakra Raj Stotra
चक्रराज स्तोत्र (Chakra Raj Stotra) एक विशेष स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र की स्तुति करता है। इसे वैदिक या तांत्रिक परंपरा में अत्यंत प्रभावशाली रक्षा कवच है। इसका उद्देश्य नकारात्मक शक्तियों, शत्रुओं, और रोगों से रक्षा करना है। Chakra Raj Stotraचक्रराज स्तोत्र प्रोक्त पंचदशी विद्या महात्रिपुरसुन्दरी।श्रीमहाशोधोषी प्रोक्ता महेश्वरी सदा.1. प्रोक्ता श्रीददक्षिणा काली…
-

घटिकाचल हनुमान स्तोत्रम् – Ghatikachala Hanuman Stotram
घटिकाचल हनुमान स्तोत्रम् एक अत्यंत शक्तिशाली और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो घटिकाचल (तमिलनाडु के पासवाले श्री घटिकाचलम् – वर्तमान में Sholingur के नाम से प्रसिद्ध) क्षेत्र में स्थित घटिकाचल हनुमान जी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र घटिकाचल पर्वत पर विराजमान भगवान हनुमान के रूप, गुण, बल, पराक्रम और करुणा का गौरवगान करता है। घटिकाचल…
-

Gopika Virah Geetam
गोपिका विरह गीतम् श्रीमद्भागवत महापुराण (भागवत पुराण) के दशम स्कंध (Book 10), अध्याय 30 में वर्णित एक अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण गीत है, जिसमें गोपियों द्वारा श्रीकृष्ण के वियोग में गाया गया विलाप (विरह) वर्णित है। Gopika Virah Geetamगोपिका विरह गीतम् एहि मुरारे कुंजविहरे एहि प्रणत जन बन्धोहे माधव मधुमथन वरेण्य केशव करुणा सिंधोरास निकुंजे…
Got any book recommendations?